Amritvani Part 6 (01) Ab hum dono kul ujayari

July 7, 2015
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ईश्वर-पथ पर कोई निर्गुण उपासक है तो कोई सगुण। कबीर कहते हैं कि अब ऐसी स्थिति आ गयी है कि दोनों कुल अर्थात् सगुण भगवान और निर्गुण ब्रह्म दोनों ही मुझमें प्रकाशित है। दोनों साधना एक ही हैं, अन्त में दोनों एक ही तत्व में विलीन हो जाती हैं।

Amritvani Part 6 (02) Aneko prshna aise hai

July 7, 2015
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ईश्वरीय पथ में साधन जागृत हो गया, बीजारोपण हो गया तो बीज का नाश नहीं होता, यह दुहराया नहीं जाता। इसी प्रकार बहुत से उत्तर भी ऐसे हैं जो बतलाये नहीं जाते, अनुभवगम्य हैं। वाणी से सब कुछ कह देने पर भी साधना जागृत होने पर ही समझ में आती है।

Amritvani Part 6 (03) Todana tute hua dilko

July 7, 2015
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मग्न हृदय लोगों को ठेस नहीं पहुँचाना चाहिए। परिस्थिति बदलते देर नहीं लगती अतः हताश नहीं होना चाहिए। इस संसार में जिसका कोई नहीं होता उसका रक्षक परमात्मा स्वयं हुआ करता है।

Amritvani Part 6 (04) Siddha hai koi atit

July 7, 2015
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इस भजन में सिद्ध के लक्षण, गुणातीत के लक्षण, संन्यास की स्थिति, परमहंस के लक्षण विजयाहवन इत्यादि का स्पष्टीकरण के साथ महापुरुष की रहनी का चित्रण है। सन्तों के लिये उपयोगी दिशा-निर्देश है।

Amritvani Part 6 (05) Payoji maine ram ratan dhan payo

July 7, 2015
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परमात्मा के अनन्त नाम हैं, सभी एक-दूसरे से बढ़-चढ़कर हैं, किन्तु वास्तविक नाम एक जागृति है जो सद्गुरु द्वारा प्राप्त होती है। इसी संदर्भ में माता मीरा का यह भजन है। नाम को लेकर अनेकानेक उलझे प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत कैसेट है।